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Geography Quick revision

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  उत्तर प्रदेश  35.नवाबगंज पक्षी अभयारण,उन्नाव 36.पार्वती अरगा पक्षी अभ्यारण,गोंडा  37.समन पक्षी अभयारण, मैनपुरी   38.समसपुर पक्षी अभयारण,रायबरेली  39.सांडी पक्षी अभयारण,हरदोई  40.सरसई नवार झील, इटावा   41.ऊपरी गंगा नदी, ब्रजघाट से नरौरा तक 42.सूर सरोवर(कीथम झील) :

मैंग्रोव वन

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मैंग्रोव के रिक्तिकरण के कारणों पर चर्चा कीजिए और  तटीय पारिस्थितिकी का अनुरक्षण करने में इनके महत्व को स्पष्ट कीजिए। मैंग्रोव शब्द दलदल में पेड़ों और झाड़ियों को संदर्भित करता है। यह अक्सर ऐसे क्षेत्रों में उगते हैं जहां नदी (मीठे पानी) तथा सागर (खारे पानी) का मिश्रण होता है। मैंग्रोव की विशेषताएँ:  मोमयुक्त पत्ते मैंग्रोव, रेगिस्तानी पौधों की तरह, मोटे पत्तों में ताजा पानी जमा करते हैं।पत्तियों पर एक मोम का लेप जल को अपने अंदर अवशोषित रखता है और वाष्पीकरण को कम करता है। लवणीय वातावरण  मे अत्यधिक प्रतिकूल जैसे उच्च नमक और कम ऑक्सीजन की स्थिति, में भी जीवित रह सकते हैं। कम ऑक्सीजन मे किसी भी पौधे के भूमिगत ऊतक को श्वसन के लिये ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। लेकिन मैंग्रोव वातावरण में मिट्टी में ऑक्सीजन सीमित या शून्य होती है।इसलिये मैंग्रोव जड़ प्रणाली वातावरण से ऑक्सीजन को अवशोषित करती है। विवियोपोरस- उनके बीज मूल वृक्ष से जुड़े रहते हुए अंकुरित होते हैं। एक बार अंकुरित होने के बाद अंकुर बढ़ने लगते है। परिपक्व अंकुर पानी में गिर जाता है और किसी अलग स्थान पर पहुँच क...

पृथ्वी की अक्षांश रेखाए

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पृथ्वी की अक्षांश रेखाए अक्षांश  रेखाओं की संख्या 181 है.  अक्षांश  वह कोण है, जो विषुवत रेखा और किसी अन्य स्थान के बीच  पृथ्वी  के केन्द्र पर बनती हैं.  विषुवत रेखा को शून्य अंश की स्थिति में माना जाता है. यहां से उत्तर की ओर बढ़ने वाली कोणिक दूरी को उत्तरी   अक्षांश  और दक्षिण की दूरी को दक्षिणी   अक्षांश  कहते हैं. 1.सभी अक्षांश रेखाऐं एक दूसरे के समाना्तर खाने होते हुए पूर्ण वृत्त के रूप में होती हैं। अत: इन्हें Parallels भी कहा जाता है। 2.सभी अक्षांश रेखाऐं ग्लोब पर शुद्ध पूर्व-पश्चिम दिशा में खींची हुई होती हैं। 3.सभी अक्षांश रेखाओं में केवल भूमध्य रेखा ही वृहत वृत (Great Circle) होती है। 4.भूमध्य रेखा एवं ध्रुवों को छोड़कर शेष सभी अक्षांश रेखाएं लघु वृत होती हैं। 5.भूमध्य रेखा के दोनों ओर अक्षांशीय वृत्त छोटे होते जाते हैं। 6.उत्तरी व दक्षिणी ध्रुव बिन्दु मात्र होते हैं। 7.अक्षांश रेखाओं का अधिकतम मान 90° उत्तर अथवा 90° दक्षिण तक होता है। 8.सभी अक्षांश रेखाऐं समान दूरी (1° के अन्तराल पर लगभग 111 कि.मी.) पर खींची जाती हैं । 9.1° के...

पृथ्वी की आंतरिक संरचना (Internal Structure of Earth )

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 पृथ्वी की आंतरिक संरचना ( Internal Structure of Earth ) पृथ्वी की आंतरिक संरचना की जानकारी भूगर्भिक ताप , ज्वालामुखी क्रिया , चट्टानों का घनत्व , भूकम्पीय तरंग के आधार पर प्राप्त होती है ।   सर्वप्रथम पृथ्वी को गोलाकार ( Spherical ) अरस्तू ने कहा  कॉपरनिकस ने 1543 ई . में बताया कि पृथ्वी नहीं अपितु सूर्य ही ब्रह्माण्ड के केन्द्र में है । इसलिए पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है ।  पूरी पृथ्वी का औसत घनत्व 5.5 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर है । दबाव बढ़ने के साथ घनत्व बढ़ता है । पृथ्वी में प्रत्येक 32 मी की गहराई पर 1°C तापमान की वृद्धि होती है। 1.पृथ्वी की परतें ( Layers of The Earth ) रासायनिक संगठन के आधार पर पृथ्वी की तीन मुख्य परतें हैं ( a ) सियाल ( Sial ) - यह पृथ्वी की ऊपरी परत है , जिसमें सिलिका ( Si ) एवं एल्युमिना ( AI ) पाया जाता है । इस परत में ग्रेनाइट की अधिकता है और इस परत की चट्टानें अम्लीय होती हैं ।  ( b ) सीमा ( Sima ) - यह पृथ्वी की दूसरी परत है , जिसमें सिलिकन ( Si ) एवं मैग्नीशियम ( Mg ) की अधिकता है । यहाँ क्षारीय चट्टानों की अधिकता ...

आकाशगंगा और सूर्य(Galaxy & Sun)

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  आकाशगंगा की संरचना  मंदाकिनी की आकृति सर्पीलाकार है जिसकी मुख्यतः तीन भुजाएं हैं। तारों की विशाल समूह को आकाशगंगा कहा जाता है। ब्रम्हांड में कुल तारों की संख्या  10 22   बतााई गई है। आकाशगंगा के बाहरी भुजा पर तारों का जन्म होता है। तारों के प्रारंभिक अवस्था को नेबुला कहा जाता है जो हाइड्रोजन गैस तथा धूल कणों के संयोग से बना होता है इसी को भ्रूण तारा करते हैं। धीरे-धीरे भ्रूण तारा का विकास होता है। उसके आंतरिक भाग में नाभिक की संरचना पाई जाती है। जहां नेबुला का धीरे-धीरे विकास होता है। नेबुला के नाभिक में उपस्थित हाइड्रोजन संलयन के फलस्वरुप हीलियम में परिवर्तित होने लगता है जिससे नेबुला धीरे-धीरे प्रकाश को उष्मा प्रदान करता है। नेबुला का आकार बड़ा होकर शैशवावस्था में परिवर्तित होता है। धीरे-धीरे यह तारा आकाशगंगा की परिक्रमा करता हुआ आगे की ओर बढ़ता रहता है किंतु नाभिक में हाइड्रोजन का एकत्रीकरण जारी रहता है। इस प्रकार यह तारा किशोरावस्था में प्रवेश करता है जहां इसकी आकृति विशाल रूप में परिवर्तित होती है किंतु हाइड्रोजन का उतनी तेजी से हीलियम में परिवर्तन नहीं हो पा...

Evolution of the earth(Part-3): Dualism Hypothesis

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  B.द्वैतवादी विचारधारा(Dualism Ideology) 1.चैम्बरलीन और मोल्टन- ग्रहण परिकल्पना  2.जेम्स,जींस और जेफरीज़- ज्वारीय परिकल्पना 3.रसैल- द्वैतारक परिकल्पना नोटःइन तीनों वैज्ञानिकों की विचारधाराओं को जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://upscgeography21.blogspot.com/2021/02/evolution-of-earthpart2-dualism.html?m=1 4.होयसल और  लिलिटन-नवतारा परिकल्पना 5.आटो श्मिड-अंतः तारक धूल परिकल्पना  6.जॉर्ज लेमेंटेयर- बिग बैंग थ्योरी 4.होयसल और  लिलिटन-नवतारा परिकल्पना 1939ई॰ में कैंब्रिज विश्वविद्यालय के गणित तथा भौतिकी विभाग के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे जिन्होंने ग्रहों की उत्पत्ति के संदर्भ में अभिनव/ नव तारा/सुपरनोवा विस्फोट परिकल्पना को  होयसल ने अपने बुक Nature of the Earth में  प्रस्तुत की। इनकी यह परिकल्पना न्यूक्लियर फिजिक्स पर आधारित था। इससे पहले जेम्स जींस के सामने यह समस्या  थी कि पृथ्वी की उत्पत्ति शुरू से नहीं हुई है क्योंकि सूर्य में हाइड्रोजन तथा हीलियम की प्रधानता है, परंतु पृथ्वी में सिलिकॉन एलमुनियम आयरन  तत्व की प्रधानता है।इस प्रकार होय...