Evolution of the earth(Part2): Dualism Hypothesis

 

वैज्ञानिक विचारधारा 

A.अद्वैतवाद, विचारधारा

1.इमानुएल कांट-वायव्य राशि परिकल्पना

2.लाप्लांस व रास-निहारिका परिकल्पना

नोट-इन विचारधाराओं का अध्ययन करने के लिए Evolution of the Earth के part-1 में जाए।

https://upscgeography21.blogspot.com/2021/02/evolution-of-earthhypothesis.html?m=1


B.द्वैतवादी विचारधारा(Dualism Ideology)

1.चैम्बरलीन और मोल्टन- ग्रहण परिकल्पना 

2.जेम्स,जींस और जेफरीज़- ज्वारीय परिकल्पना

3.रसैल- द्वैतारक परिकल्पना

4.होयसल और  लिलिटन-नवतारा परिकल्पना

5.आटो श्मिड-अंतः तारक धूल परिकल्पना 

6.जॉर्ज लेमेंटेयर- बिग बैंग थ्योरी


B.द्वैतवादी विचारधारक

1.चैम्बरलीन और मोल्टन: ग्रहाणु परिकल्पना

1905 ई• में चैंबरलीन तथा मोल्टन ने द्वैतवादी विचारधारा के अंतर्गत ग्रहाणु परिकल्पना का प्रतिपादन किया। इनके अनुसार ब्रह्मांड में सूर्य के अतिरिक्त एक विशालकाय साथी तारा भी था जो सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हुए धीरे-धीरे सूर्य के निकट आ रहा था जिसके परिणाम स्वरुप दोनों के मध्य आकर्षण बल कार्य किया तथा सूर्य से ही छोटे-छोटे ग्रहाणु निकलने लगे। बाद में यही ग्रहाणु एकत्र होकर ग्रह का रूप धारण कर लिए। बाद में साथी तारा सूर्य से दूर जाने लगा, किंतु ग्रह सूर्य के संपर्क में ही बने रहे और सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने लगे। इसप्रकार चैंबरलीन ने दो तारों के सहयोग से ग्रहों की उत्पत्ति की समस्या को हल करने का प्रयास किया किंतु बाद में इनकी आलोचना भी की गई। 

   आलोचना: ग्रहाणुुओ से ही इतने बड़े सौरमंडल का निर्माण कैसे हुआ, जो मिथ्य प्रतीत होता है। इसके अलावा चेंबरलीन ने पृथ्वी पर महासागर तथा वायुमंडल की संरचना को बताया जो अविश्वसनीय लगता है।

2.जेम्स,जींस और जेफरीज़- ज्वारीय परिकल्पना

1919 ई•मे जेम्स जींस ने पृथ्वी की उत्पत्ति के संदर्भ में ज्वारी परिकल्पना के बारे में बताया। इन्होंने चैंबरलीन की भांति माना कि पृथ्वी की उत्पत्ति दो तारों के संयोग से हुई है। एक तारा सूर्य था तथा दूसरा एक विशालकाय तारा था।
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शालकाय तारा सूर्य के अपेक्षा अधिक बड़ा था और सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करता हुआ उसके निकट आ रहा था। इसके पश्चात दोनों के मध्य आकर्षण बल कार्य किया, जिसे जेम्स जींस ने ज्वारीय बल कहा और बताया कि यह ज्वारीय बल उसी प्रकार हुआ जैसे वर्तमान समय में चंद्रमा के आकर्षण बल के कारण पृथ्वी पर ज्वार आते हैं। इसी ज्वारीय बल के कारण सूर्य से सिगार की उत्पत्ति हुई इसके पश्चात विशालकाय साथी तारा सूर्य से दूर जाने लगा। सूर्य से उत्पन्न सिगार भी उसके आकर्षण बल के कारण बढ़ने लगा अंततः फिलामेंट के रूप में सामने आया जिसका मध्य भाग चौड़ा तथा किनारे वाला भाग संकरा था दूर जाता हुआ साथी तारा विलुप्त हो गया, परंतु फिलामेंट सूर्य के साथ बना रहा। इसी फिलामेंट के विखंडन से ग्रहों की उत्पत्ति हुई क्योंकि फिलामेंट का मध्य भाग चौड़ा था जिससे बाहरी ग्रहों का आकार बड़े तथा आंतरिक भाग छोटे ग्रह थे।
इस प्रकार जेम्स जींस प्रथम विचारक थे जिन्होंने ग्रहो को आकार के अनुसार व्यवस्थित करने का प्रयास किया। इसी आधार पर ग्रहों का आयतन तथा घनत्व क्रमबद्ध रूप से व्यवस्थित किया जा सकता है। जेम्स जींस के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि यदि सूर्य से ग्रहों की उत्पत्ति हुई है तो उसमें उन्हीं तत्वों की प्रधानता होने चाहिए जो सूर्य में होता है और पृथ्वी में हाइड्रोजन तथा तथा हीलियम भी मौजूद होना चाहिए जो वास्तविकता से परेह है।
   
आगे चलकर जेफ्रीज महोदय ने ज्वारीय परिकल्पना में संशोधन किया और बताया कि ग्रहों की उत्पत्ति 3 तारों (सूर्य,  विशालकाय साथी तारा और अन्य तारा) से हुआ है। तीसरा तारा सूर्य की परिक्रमा करता हुआ निकट आ रहा था। एक समय ऐसा आया कि वह साथी तारा के सीध में आने के कारण टकराने के कारण छोटे-छोटे टुकड़ों में विखंडित हुआ फलस्वरुप ग्रहों की उत्पत्ति हुई।
3.रसैल- द्वैतारक परिकल्पना(Binary Star Hypothesis)

1937 ईस्वी में रसेल ने पृथ्वी की उत्पत्ति से संबंधित  द्वैतारक परिकल्पना का प्रतिपादन किया। इनके बीच लगने वाले कोणीय बल की पुष्टि की। इन्होंने बताया कि सूर्य के अलावा एक विशालकाय तारा था तथा एक अन्य तारा भी इसमें एक तारा सूर्य के चारों ओर  वामावर्त (Anticlockwise) चक्रण कर रहा था तो वहीं दूसरा  इसके विपरीत दक्षिणावर्त (clockwise) चक्रण कर रहा था अन्य तारा परिक्रमा करता हुआ वामावर्त करने वाले तारा के निकट आ रहा था। इस प्रकार धीरे-धीरे वह साथी तारा के निकट पहुंचने लगा क्योंकि दोनों विपरीत दिशा में चक्रण कर रहे थे। जिस कारण उनके मध्य लगने वाला कोणीय बल अधिक प्रभावित हुआ है। इसी के परिणामतः साथी तारा से ज्वारीय बल के कारण सिगार की उत्पत्ति हुई। फिर उसके पश्चात फिलामेंट बने तथा उसी से ग्रहों तथा उपग्रहों की उत्पत्ति हुई।

           उपरोक्त परिकल्पना से स्पष्ट होता है कि ग्रहों की उत्पति सूर्य से नहीं हुआ। उसके अलावा ज्वारीय बल इतना प्रभावी कैसे हुआ इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया।




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