Life of star: Chandrashekhar Limit,Dwarf, Neutron Star or Black Hole?


वैज्ञानिक पृष्ठभूमि 

  • 1783 में   सर्वप्रथम जॉन मिशन ने यह बताया कि अंतरिक्ष में कोई चीज ऐसा है जो सब कुछ अपने अंदर समाहित करने की क्षमता रखता है। 
  • 1796 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक पियरे साइमन लाप्लांस ने विस्तार से चर्चा की ।Book- the system of the world
  • 1915 ईस्वी में आइंस्टीन ने सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत यानी थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी दिया। उन्होंने पहले ही सिद्ध कर चुके थे कि गुरुत्वाकर्षण प्रकाश स्थिति पर प्रभाव डालता है।परंतु उन्होंने प्रकाश और गुरुत्वाकर्षण के ही बातों की व्याख्या की थी ब्लैक होल की नही।
  • 1967 में जॉन व्हीलर ने सर्वप्रथम ब्लैक होल शब्द का प्रयोग किया।

तारे का जीवन चक्र 



जब तारे का पूरा का पूरा ईंधन जल जाता है तो उसमें एक ज़बरदस्त विस्फोट होता है जिसे सुपरनोवा कहते हैं। विस्फोट के बाद जो पदार्थ बचता है वह धीरे धीरे सिमटना शुरू होता है और बहुत ही घने पिंड का रूप ले लेता है जिसे न्यूट्रॉन स्टार कहते हैं। अगर न्यूट्रॉन स्टार बहुत विशाल है तो गुरुत्वाकर्षण का दबाव इतना होगा कि वह अपने ही बोझ से सिमटता चला जाएगा और इतना घना हो जाएगा कि वे एक ब्लैक होल बन जाएगा और श्याम विवर, कृष्ण गर्त या ब्लैक होल के रूप में दिखाई देगा अर्थात जब तारा अपना अंतिम समय पूरा कर लेता है तो वह निम्नलिखित तीन प्रकार के तारों में विभक्त होता है  अपने अंतिम समय मे तीन रूपों मे से किसी एक को ही धारण करता है(इनकी धारण करने की क्षमता चंद्रशेखर सीमा पर आधारित है)  जो इस प्रकार है -

1.श्वेत वामन(white dwarf)

2.न्यूट्रान तारा(Neutron Star)

3.कृष्ण छिद्र (Black Hole)

चंद्रशेखर सीमा


सबसे बड़ा द्रव्यमान जो एक सफेद बौना तारा है जो स्थिर हो सकता है, चंद्रशेखर सीमा के रूप में जाना जाता है।  इस सीमा का उल्लेख सबसे पहले विल्हेम एण्डर्सन और ई सी स्टोनर ने 1930 में प्रकाशित अपने शोधपत्रों में किया था। किन्तु भारत के खगोल भौतिकशास्त्री सुब्रमण्यन चन्द्रशेखर ने 1930 में,21 वर्ष की आयु में,सामान्य सापेक्षता का सिध्दांत का प्रयोग करते हुए सीमा की खोज की और इस सीमा की गणना को और अधिक शुद्ध बनाया।


 चंद्रशेखर इकाई का उपयोग एक सफेद बौने तारे के अधिकतम द्रव्यमान को समझाने के लिए किया जाता है जो 1.44 सौर द्रव्यमान के बराबर होता है। इसी 1.44 के concept को चंद्रशेखर सीमा कहते है।

चंद्रशेखर सीमा का प्रयोग करते हुए निम्न तीनो तारे को परिभाषित किया जा सकता है-

1. श्वेत वामन(White Dwarf)


ऐसा द्रव्यमान जिनका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान से 1.44 गुना कम  या उसके बराबर होता है वह तारा अपनी अंतिम अवस्था में श्वेत वामन बनता है।

2.न्यूट्रॉन तारा(Neutron Star)


ऐसा तारा जिनका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान से 1.44 गुना अधिक होता है, वह तारा अपनी अंतिम समय में न्यूट्रॉन तारा बनता है।

3. कृष्ण छिद्र(Black Hole)


ऐसा तारा जिनका द्रव्यमान न्यूट्रॉन तारा के 3 गुना से भी ज्यादा होता है वह कृष्ण छिद्र बनते है।

          ब्लैक होल में न्यूट्रॉन प्रोटोन के घनत्व से ज्यादा पाए जाते हैं।न्यूट्रॉन में किसी पदार्थ को अपनी तरफ आकर्षित करने की क्षमता अधिक होती जिससे पदार्थ आकर्षित होते हैं और धीरे-धीरे आकर्षित होकर समाहित होते चले जाते हैं।किसी ब्लैक होल का पूरा द्रव्यमान एक बिंदु में केंद्रित रहता है जिसे केंद्रीय विलक्षणता बिंदु कहते हैं। इसे विलक्षणता बिंदु के आसपास एक गोलाकार सीमा की कल्पना की गई है, जिसे आमतौर पर घर घटना से देश कहा जाता है।एजेंट फॉर एजेंट के सीमा के अंदर यदि कोई पदार्थ आता है तो ब्लैक होल का शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल अपनी ओर खींच लेता है और बाहर आना और संभव हो जाता है।

ब्लैक होल के प्रकार 

भार और आकार के हिसाब से ब्लैक होल चार तरह के होते हैं-

1. सुपरमैसिव ब्लैक होल्स सबसे विशाल होते हैं। यह कई मिलियन सूर्य की शक्ति के बराबर होते हैं।आकाशगंगा के बीच में मौजूद जहां बहुत सारे तारों का झुंड और गैस के बादल होते हैं, इसकी वजह से सुपरमैसिव ब्लैक होल्स हमेशा बढ़ते रहते हैं।

M87 Black Hole
अप्रैल 2019 में, शोधकर्ताओं के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सहयोग ने इवेंट मे क्षितिज टेलीस्कोप का उपयोग आकाशगंगा मेसियर 87 के केंद्र में एक ऐसे सुपरमैसिव ब्लैक होल की छवि बनाने के लिए किया, जो लगभग 54 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित है।

2.मध्यवर्ती (Intermediate Black Hole) हजारों सौर द्रव्यमान शामिल होते हैं।


उन्हें अति चमक वाला एक्स रे स्रोतों के लिए एक संभव शक्ति स्रोत के रूप में प्रस्तावित किया गया है

3.स्टेलर ब्लैक होल सामान्य रूप में पाए जाते हैं जिनका भार सूरज से लगभग 20 गुना ज्यादा होता है।

NASA
यह तब बनते हैं जब कोई बहुत बड़ा तारा टूट जाता है,इस प्रक्रिया को सुपरनोवा कहते हैं।

4.मिनिएचर ब्लैक होल - इस प्रकार के ब्लैक होल का अभी तक खोज नहीं हो पाया है।

हमारी पृथ्वी के सबसे नजदीकी ब्लैक होल


हमारी पृथ्वी से सबसे नजदीकी ब्लैक होल HR6819 लगभग 1600 प्रकाश वर्ष दूरी पर है, परंतु पृथ्वी के सौरमंडल पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि इसका गुरुत्व प्रभाव यहां तक नहीं पहुंचता है।

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